विद्यार्थी जीवन और सोशल मीडिया

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प्रिय विद्यार्थियो इस लेख में हम विद्यार्थी और सोशल मीडिया से जुड़े कुछ अलग अलग प्रभावों पर प्रकाश डालेंगे। इसलिए यह बहुत जरूरी रहेगा कि आप इसे एक गहनता के साथ पढ़ें, और विचारें। यहां सोशल साईटस के दो अलग अलग पहलू रखें गए हैं सकारात्मक और नकारात्मक। शायद आप सकारात्मकता पढ़कर खुशी महसूस करेंगे, लेकिन शर्त यह भी कि आप सोशल साईट के नकारात्मक परिणामों को भी गहराई से पढ़ें और उन्हें समझें। शायद ही कोई व्यक्ति हो जो सोशल मीडिया से अपरिचित हो। और ना ही हम इस बात को नकार सकते कि आज का युवा सोशल मीडिया से पूर्णतः जुड़ा है- अब चाहे वह फेसबुक , व्हाटसऐप या जो भी। सोशल मीडिया का विद्यार्थी ही नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए उचित और सीमित समय के लिए उपयोग ही सही ठहराया जा सकता है। अर्थात् सोशल मीडिया को तभी हम अपने लिए लाभदायक बता सकते हैं। सोशल मीडिया का उपयोग स्वयं के इस्तेमाल करने के तौर – तरीकों पर निर्भर करता है कि हम इसका अपने जीवन में कैसा प्रभाव देखना चाहते हैं। क्योंकि हम यह भी जानते हैं कि किसी चीज़ की अति होने लगे तो परिणाम क्या रहता है कहने का मतलब सोशल साईटस का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल निश्चित ही नकारात्मक प्रभावों से ढका है। हां यह कोई बुराई नहीं कि हम इनका उपयोग करते हैं – क्यों कि सोशल मीडिया ने विद्यार्थी को विद्यार्थी से जोड़ा है। सोशल मीडिया विद्यार्थी को एक स्थान पर रहते हुए भी बाहरी क्रिया कलापों से अपडेट करता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी पढ़ाई से संबंधित सामग्री बहुत कम समय में एक – दूसरे से साझा कर सकता है, प्राप्त कर सकता है । अपने विचारों को साझा कर सकता है। लेकिन अब हम इन सब सकारात्मकता से आगे बढ़कर सोशल हाईटस के दुष्परिणामों की ओर झांकते हैं । सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे है यह कोई बुराई नहीं है विपरीत कि हम इसका किस तरह से प्रयोग करतें हैं वह बात प्रभावशाली है।

सोशल साईट की लत ऐसी है कि व्यक्ति इससे बहुत समय तक लगातार जुड़ा रहता है। लेकिन आपने कभी गौर की हो तो जब हम मोबाइल, लैपटॉप का अधिक समय तक लगातार उपयोग करके इससे दूर होते हैं तो कुछ अलग सा महसूस होता है मानो हमें अचानक से किसी अजनबी, अजीब जगह पर छोड़ दिया गया हो। यह वास्तविकता है लेकिन इसका मुख्य कारण है वह है अकेलापन अर्थात् सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से ऐसी आदत बन जाती है कि उसके बिना व्यक्ति स्वयं को ठगा सा महसूस करता है। इतना ही नहीं ऐसे में हमारा ध्यान बार- बार अपने मोबाइल फोन की तरफ जाता है और बार – बार यह देखा जाता है कि –क्या संदेश आया होगा, या फिर किसी करीबी मित्र का समय पर reply न दिया तो वो नाराज हो जाएगा।।

बस इसी तरह से दिमाग में धुन सवार रहती है। लेकिन वास्तविकता देखें तो यह सब एक विद्यार्थी के लिए कितना खतरनाक साबित होता है, जब वह अपने स्कूल कॅालेज में पढ़ाई के सुनहरे अवसर में अपना जीवन सोशल मीडिया के अनुचित प्रयोग से भ्रष्ट कर देता है। इसलिए एक विद्यार्थी जीवन में उचित यही रहेगा कि सोशल साईट का एक निश्चित समय में उपयोग किया जाए, उचित उपयोग किया जाए। साथ ही इनमें होने वाले भद्देपन से जितना अधिक किनारा किया जाए वही बेहतर है। विद्यार्थियो आपको इस लेख से केवल मात्र एक छोटा सा संदेश मिल सकता है। लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आप जीवन में कुछ अच्छा करें तो इसका फैसला केवल आपके हाथ में हैं। आप अपने जीवन के बारे में खुद ही कुछ विचार कर सकते हैं और अपने आप को बदल सकते हैं, दूसरा केवल आपको प्रेरित कर सकता है । इसलिए एक बार नहीं बल्कि बार बार अपने जीवन के बारे में गहनता से विचार कीजिए कि आप कहीं रस्ते से भटक तो नहीं…………..????

प्रिय विद्यार्थियो आपको यह लेख कैसा लगा हमें अपनी राय भेजें।

 

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