विद्यार्थी जीवन में कर्तव्य पालन

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मनुष्य जीवन ऐसा है जहां हमें अपने प्रत्येक कर्तव्य को बखूबी निभाना बेहद जरूरी होता है। लेकिन मनुष्य जीवन जहां कर्तव्यों का बने रहना और उनका पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि उनके बिना हम जिन्दगी के मूल मकसद तक नहीं पहुंच सकते, और ना ही अपने जीवन को संवार सकते हैं। लेकिन इन्हीं कर्तव्यों का प्रत्येक व्यक्ति के साथ विद्यार्थी जीवन में कितना महत्व है इस बात को भी समझना होगा। सही मायनों में हमारे कर्तव्यों की शुरुआत बचपन से ही हो जाती है लेकिन विद्यार्थी जीवन ऐसा है जहां हमें अपने मूल कर्तव्यों की समझ पड़ती है। वहीं से ही हमारे सम्पूर्ण जीवन की नींव तैयार होती है और पूर्ण मनुष्य जीवन का चरित्र निर्माण होता है। अब वास्तविकता यह है कि जैसी हमारे जीवन की नींव होगी वैसे ही हम स्वयं से -राष्ट्र तक के कर्तव्य पालन रूपी भावों को समझ सकेंगे। जहां तक विद्यार्थी जीवन में मूल कर्तव्य बनता है अच्छी शिक्षा ग्रहण करना वहीं सम्पूर्ण मानव जीवन का कर्तव्य बनता है कि हम खुद की जिम्मेदारी खुद ही लें। क्योंकि हमें अच्छी मानवता की शुरुआत स्वयं से ही करनी होगी। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या हम बड़ी और अधिक से अधिक शिक्षा पाकर अपने कर्तव्यों को भली प्रकार समझ सकते हैं? शायद नहीं अवश्य हम शिक्षा से रोजगार प्राप्त कर लें ।लेकिन हमें अपने कर्तव्यों को जानने और उनका पालन करने के लिए कर्तव्यनिष्ठ और वचनबद्ध होना पड़ेगा। इतना ही नहीं बल्कि हमें दूसरों के कर्तव्यों की ओर झांकने ओर आदेश देने की बजाय स्वयं के कर्तव्यों को निहारना होगा। तभी हम अपने जीवन के मकसद तक पहुँच सकते हैं। कर्तव्य का स्तर यहां तक ही नहीं कि हम केवल अपनी महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने के लिए कार्य करें। बल्कि हम विचार करें कि हम दूसरों के लिए और समाज के लिए अपना हाथ कहाँ तक बढ़ा सकते हैं। इन सब बातों को हम केवल मात्र पुस्तकों में पढ़कर नहीं सीख सकते बल्कि इनके लिए हमें दूसरे लोगों और बाहरी दुनिया को पैनी नज़र से ताकना होगा यहां तक कि हमें बहुत पीछे हमारे पूर्वजों के साथ भगवान राम और आज्ञापालन श्रवण कुमार के जीवन का स्मरण करना होगा। एक नजर में देखे तो बचपन में हमारा कर्तव्य केवल माता पिता की आज्ञा का पालन करने तक सीमित है लेकिन विद्यार्थी जीवन में पैर रखने के पश्चात गुरु ओर बड़ों और धीरे धीरे समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक होता है। इतना ही नहीं हमारे जीवन में और भी बहुत छोटे – छोटे कर्तव्य बनते हैं जिनका पैमाना हमारे भविष्य के लिए बड़ा होता है। अब चाहे वह हमारे घर,विद्यालय की साफ – सफाई से लेकर दूसरों की मदद करने तक क्यों न हो। बल्कि यहीं से हमारी पहचान एक अच्छे चरित्रवान नागरिक के रूप में होती है। इसलिए यह अतिआवश्यक है कि हम अपने अपने जीवन के प्रत्येक कर्तव्य को समझें और उन्हे पूरा कर कर्तव्यपालक के रुप में पहचान बनायें।
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