विद्यार्थी जीवन और स्वास्थ्य

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प्रिय विद्यार्थियो कहा जाता है विद्यार्थी जीवन में सबसे महत्वपूर्ण कार्य है तो वह है पढ़ाई । लेकिन क्या हम जानते हैं पढ़ाई के साथ – साथ स्वयं को स्वस्थ रखना कितना जरूरी है। हमने अपने जीवन में इस बात को कहीं न कहीं अवश्य पढ़ा या सुना है कि – पहला सुख~निरोगी काया अर्थात् प्रत्येक मनुष्य जीवन में यदि सबसे बड़ा और प्रथम सुख है तो तन से स्वस्थ रहना है । क्योंकि चेहरे पर मुसकान और अपने कार्य में रुचि केवल स्वास्थ्य से भरपूर व्यक्ति ही दिखा सकता है। तो अब हम इस बात को अच्छे से समझ सकते हैं कि एक विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ते रहने के लिए स्वस्थ तन और स्वस्थचित्त कितना अहमियत रखता है।
स्पष्ट रूप में कहें तो एक विद्यार्थी अस्वस्थ और चिंता से घिरा रहकर अपने जीवन को सफल नहीं बना सकता चाहे वह अमीर घराने से क्यों न हो, इसके विपरीत यदि विद्यार्थी तन से स्वस्थ है तो उसका बाहरी कठिनाईयों और बाधाओं की ओर ध्यान न होकर केवल अपने जीवन को सफल बनाने की ओर है।
देखिए वैसे तो स्वस्थ रहना पूर्णतः हमारे हाथ में नहीं है और ना ही हम अस्वस्थ व्यक्ति को स्वयं का दोषी कह सकते। लेकिन फिर भी हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने शरीर का ख्याल करें। बहुत बार ऐसा भी होता है कि हम मामूली शारीरिक दिक्कत को बहुत हल्के में लेते हैं और उसका ईलाज करवाने में लापरवाही करते हैं जो कि बाद में हमारे लिए बड़ी समस्या बन जाती है। बात करें विद्यार्थी की तो तब तक विद्यार्थी स्वयं को पढ़ाई से नहीं जोड़ पाता जब तक उसका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। लेकिन विद्यार्थी जीवन में हमारी अस्वस्थता के कुछ कारण ऐसे भी होते हैं जहां हम इसके खुद जिम्मेदार होते हैं। शायद यह बात थोड़ी अस्ंतुष्ट करने वाली लगी होगी परन्तु वास्तव में ऐसा होता है। वो इसलिए क्योंकि हम स्वयं पर अपनी पढ़ाई का बोझ अत्यधिक बना लेते हैं कहने का मतलब हम अपना अधिकतम समय पढ़ाई करने में बिताते हैं या किताबी कीड़ा बन जाते हैं। तो वहाँ हम अपनी दिनचर्या का बिल्कुल भी ख्याल नहीं करते अर्थात खाना पीना, उठना – बैठना, खेलना – कूदना। इन सब कार्यों का कोई निश्चित समय नहीं देते और सब जरूरी कार्यों को भूलकर केवल पढ़ाई ओर पढ़ाई । ऐसे में हमारी दिनचर्या बेहद खराब सी हो जाती है जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है जिसका हम पहले ख्याल नहीं कर पाते लेकिन बाद में हमें कठिनाई झेलनी पड़ती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम अपनी पढ़ाई को महत्व देते रहे लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना छोड़ दें । इसलिए हमें अपनी दिनचर्या का पूर्ण रूप से ख्याल करना होगा। हमें चाहिए कि हम अपनी पढ़ाई के साथ दिनचर्या में निम्न बातों का ध्यान रखें :-
• सुबह जल्दी उठना
• नित्य व्यायाम करना चाहिए
• सुबह सैर के लिए जाना
• समय पर भोजन करना
• शरीर की साफ सफाई
आदि बातों का ध्यान रखकर हम बहुत हद तक स्वयं को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। यहां अंत में यह कहा जाए तो ठीक रहेगा कि हमें अपनी शरीर की अस्वस्थता को मन तक नहीं पहुँचने देना चाहिए। क्योंकि जब तक हमारा मन स्वस्थ है तब तक हमारा बीमारी कुछ नहीं बिगाड़ सकती इसलिए बीमारी से मत भागीये बल्कि बीमारी को भगाईये।
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