विद्यार्थी जीवन में योग का महत्व

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प्रिय विद्यार्थियो हम आज के इस लेख में जानेंगे कि हमारे व्यक्तिगत जीवन में योग का कितना महत्व है और प्रत्येक विद्यार्थी जीवन में योग कितना लाभदायक सिद्ध होता है।

आज इस भागदौड़ भरे जीवन में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो स्वयं को किसी न किसी कार्य में व्यस्त न रखे। अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को इतना व्यस्त रखता/मानता है कि वह अपने लिए बिलकुल भी समय नहीं निकालना चाहता। इसलिए ताकि वह अपने शरीर और मन को स्वस्थ बनाए रख सके। हम इस बात को भी अच्छे से जानते हैं कि अन्य चीजों की तरह योग भी हमारी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि योग नहीं तो इसका सीधा सा असर मनुष्य की अपनी मानसिकता पर पड़ता है – अब चाहे वह तनाव या फिर विद्यार्थी के लिए पढ़ाई का बोझ। लेकिन हम इस बात को महसूस कर सकते हैं कि जब व्यक्ति की मानसिकता अस्वस्थ(तनाव) है तो वह अपने निर्धारित कार्य को कैसे जारी रख सकता है, कहाँ तक अच्छी मेहनत कर सकता है।

चलिये इन बातों से अलावा हम सही मुद्दे पर आते हैं – वो यह कि यहां एक विद्यार्थी की बात की जाए अर्थात् प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी सुन्दर दिनचर्या में योग को पिरोना कितना महत्व रखता है। सभी सहमत होंगे कि प्रत्येक विद्यार्थी किसी न किसी तनाव, चिंता से घिरा है मुख्य है पढ़ाई का बोझ। वास्तविकता जाने तो पढ़ाई का बोझ कम होते हुए भी विद्यार्थी ने अपनी छोटी कमजोरी(भूल) की वजह से उसे अपने दिमाग में पहाड़ जैसा बना लिया है। लेकिन इस बोझ और तनाव को दूर करने की मुख्य दवा कोई है तो वह योग ही है।

आइए पहले हम योग के फायदों को जान लें तो ज्यादा बेहतर होगा –

1. योग ‘मन’ को बलवान बनाता है।

2. योग शरीर को स्वस्थ बनाता है।

3. योग ‘दिमाग’ को मजबूत, तरोताजा बनाता है।

4. योग हमारी ‘एकाग्रता’ बढ़ाता है।

5. योग जो कि व्यक्ति को नशे से दूर रखता है।

और योग का सबसे बड़ा लाभ कि जो व्यक्ति योग करता है उसकी प्रत्येक सुबह एक नयी सुबह है अर्थात् नयी ऊर्जा, ताजगी, स्वस्थ तन, स्वस्थ मन।

एक सरल भाषा में समझने वाली बात है कि आज विद्यार्थी को प्रतिस्पर्धा के इस दौर में एक तरफ पढ़ाई का पूरा बोझ झेलना पड़ता है, जबकि दूसरी तरफ विद्यार्थी अपनी अन्य शारीरिक क्रियाओं जैसे योग,खेल आदि को महत्व न देकर केवल ओर केवल पढ़ाई करने में ही लगा रहता है । और यह स्थिति परीक्षा के नजदीक आने पर तो और अधिक बढ़ जाती है। कहने का मतलब प्रत्येक विद्यार्थी यही चाहता है कि वह अन्य जरूरी कार्यों(योग,खेल,मनोरंजन) को छोड़ कर केवल पढ़ाई को ही महत्व दे ,ऐसे में विद्यार्थी पढ़ाई से महत्वपूर्ण कोई कार्य नहीं समझता, लेकिन यह पूर्णतः सही नहीं है। क्योंकि विद्यार्थी जीवन में जितना जरूरी पढ़ाई करना है , उतना ही जरूरी शरीर, मानसिकता को स्वस्थ रखना है। क्यों कि बिना किसी तनाव के और स्फूर्तिदायक मन के साथ अध्ययन किया जाए तो ही वह लाभदायक सिद्ध होता है। अब हम इस बात को सोच समझ सकते हैं कि विद्यार्थी जिसे पढ़ाई की चिंता है और वही उसका बोझ बनी है, वह पढ़ाई को लेकर तनाव महसूस करता है। तो ऐसे में उसका ध्यान सीधे अपनी पुस्तकों की ओर जायेगा, यहां तक कि वह यही समझेगा कि यह तनाव पढ़ाई करके दूर होगा, तो जान लें कि यह सीधे तौर पर संभव नहीं है। क्योंकि एक तो हम पहले से तनावग्रस्त हैं और दूसरी तरफ यदि अपने शरीर और स्वास्थ्य अर्थात् योग को महत्व नहीं देगें तो शायद यह तनाव घटने की बजाय ओर अधिक बढ़ जाएगा।

इसलिए साफ़ शब्दों में कहा जाए तो विद्यार्थी जीवन में पढ़ाई तो महत्वपूर्ण है ही लेकिन चाहिए कि यह पढ़ाई बोझ ना लगे ओर हम रुचि और स्फूर्ति के साथ पढ़ें तो इसके लिए अपने आप को योग से जोड़ना बेहद जरूरी है। तभी हम अपने स्वस्थ तन,मन और स्वस्थ जीवन का विकास कर सकते हैं।

 

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4 COMMENTS

  1. sir,dukh ki baat yah hai ki pahale mere school(jnv) me morning me yaga hota tha, lekin pichhle kai mahino se nahi hota hai.aab mai sabako yoga karne ke liye prerit karunga avam apne p.ed teacher ko bhi yoga karane ke liye prerit karunga.

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