हमारा अभ्यास हमारी जीत

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हमारा अभ्यास ही हमारी जीत है

‘अभ्यास’ (practice) एक ऐसी कला है जो मनुष्य को बिल्कुल शून्य से उठाकर उस कार्य में निपुण (perfect) बना देती है – जिसे व्यक्ति अपना लक्ष्य बनाकर मेहनत करता है।

संत कबीरदास जी ने लिखा है –

करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान ।

रसरी आवत-जात के सिल पर परत निशान।।

 

जिस प्रकार कुएँ से पानी निकालने के बार – बार किए गये अभ्यास से पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं। ठीक उसी प्रकार एक मन्दबुद्धि या मूर्ख व्यक्ति को भी अभ्यास सफलता के शिखर तक पहुँचा देता है।

 

बात की जाए एक विद्यार्थी की तो आम तौर पर एक विद्यार्थी यही सोचता है कि वह तो पढ़ाई में दूसरों से काफी कमजोर रहा है, तो वह कैसे दूसरे छात्रों से आगे निकल सकता है, कैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता अर्जित कर सकता है। लेकिन यह सोचना गलत है – क्योंकि कमजोर से कमजोर विद्यार्थी का भी सफलता अर्जित करना बिल्कुल मुमकिन है। वह अपने किसी भी विषय में महारथ हासिल कर सकता है। जरूरत है तो सिर्फ और सिर्फ ‘अभ्यास’ की।

 

अभ्यास की ताकत:-

 

महान गणितज्ञ और अणुविज्ञान के रचयिता ‘अलबर्ट आइन्स्टाइन‘ जिन्हें आज पूरी दुनिया सराहती है। परन्तु उन्होंने बार- बार ‘अभ्यास’ के बल पर ही अपने क्षेत्र में महारथ हासिल की और महान शख्सियत के रुप में पहचान बनाई।

 

अभ्यास के बल पर ही एक क्रिकेटर मैदान में अच्छा नाम कमा पाता है – महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर जिन्हें आज दुनिया God of cricket के नाम से जानती है। क्या हम कह सकते हैं कि वो बिना अभ्यास के ही मैदान पर आये और लोगों के दिलों पर राज करने लगे – नहीं ऐसा नहीं उन्हें भी खूब अभ्यास की जरूरत पड़ी।

 

किसी भी कलाकार या सिंगर , सितारे को अपने हुनर को दिखाने के लिए पहले खूब अभ्यास करना पड़ता है।

 

यदि एक विद्यार्थी चाहता है कि वह अच्छे नंबरों के साथ सफल हो तो उसे खूब ‘अभ्यास’ करने की जरूरत होगी।

इसलिए बेहतर है कि हमें अपने कार्य, लक्ष्य, या किसी विषय में परिपूर्ण होना है तो हमें पूर्णतः मेहनत और ‘अभ्यास’ करना चाहिए।

 

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