विद्यार्थी जीवन हो आदर्श से परिपूर्ण

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विद्यार्थी जीवन वह अवस्था है जहां से प्रत्येक व्यक्ति के गुजरने से उसके जीवन को मजबूत आधार प्रदान होता है । लेकिन इस मजबूत आधार को तैयार करने के लिए विद्यार्थी जीवन में जितना जरूरी है मेहनत करना उतना ही जरूरी है स्वयं के व्यक्तित्व को सुन्दर रूप देना।
अवश्य विद्यार्थी की मेहनत उसे पढ़ाई में होशियार की श्रेणी में ले आयेगी इतना ही नहीं विद्यार्थी अच्छी मेहनत के बल पर बड़ी धनराशि कमाने के लायक भी बन जाएगा। लेकिन फिर भी इन सबके बावजूद हमें जिन्दगी को सही ढंग से जीने के लिए अपने जीवन को अच्छे से संवारना बेहद जरूरी होता है। एक विद्यार्थी के लिए शायद यह बात कम आवश्यक हो कि वह हमेशा प्रथम श्रेणी पर रहे , लेकिन विद्यार्थी का अपनी पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन को लेकर कैसा रवैया है – यह अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए विद्यार्थी जीवन और उसके व्यक्तित्व से जुड़ी कुछ मुख्य बातें यहां लिखी गई है कि एक विद्यार्थी जीवन में आदर्श कैसे बना रहता है।

पढ़ाई में रूचि:-

विद्यार्थी जीवन में सबसे अहम बात है तो वह यह है कि एक विद्यार्थी अपनी पढ़ाई से कितना प्रेम करता है, पढ़ने में कितनी रुचि दिखाता है। यह बात ज्यादा मायने नहीं रखती कि विद्यार्थी दिन,हफ्ता,महिने में कितना कुछ पढ़ लेता है। बल्कि जरूरी तो यह है कि विद्यार्थी को पढ़ाई से कितनी लगन है वह स्वयं को कहाँ तक पढ़ाई से जोड़ लेता है। बस यही लगन ही विद्यार्थी को सफलता की ओर लेकर जायेगी, बजाय इसके कि कोई परिवार वालों के डर से स्कूल जाता है या पढ़ाई करता है।

सहनशील:-

यहां सहनशील शब्द को थोड़े टेढ़े रूप में लें तो बेहतर होगा।सहनशील विद्यार्थी को प्रत्येक परिस्थिति में स्वयं को तैयार रखना बेहद जरूरी है। सर्दी – गर्मी, भूख – प्यास इन चीजों को अलग परिस्थिति और उस समय झेलने की क्षमता हो जब ये अध्ययन में बाधा बने और पढ़ाई न करने का कोई बहाना बन बैठे।

शिष्य रूपी सोच:-

जी हाँ, विद्यार्थी जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि एक विद्यार्थी चाहे पढ़ने में कितना ही परिपूर्ण और होनहार क्यों न हो, फिर भी उसे स्वयं को सोच से शिष्य बने रहना चाहिए अर्थात् हमेशा सीखने की चाह रखनी चाहिए। क्योंकि इसी शिष्य रूपी सोच की वजह से ही विद्यार्थी हर क्षण बहुत कुछ सीख पाता है। यदि कोई विद्यार्थी स्वयं को ज्ञानी और होनहार समझ कर गुरु की बातों को अनदेखा करने लगे तो वह कैसे अधिक ज्ञान की प्राप्ति कर सकता है।

कर्तव्यनिष्ठ:-

विद्यार्थी को आदर्श व्यक्तित्व वाला बनने के लिए अपने प्रत्येक कर्तव्य को बखूबी निभाना ही मुख्य गुण है। यहीं से विद्यार्थी अपने सम्पूर्ण जीवन की जिम्मेदारीयों को समझ पाता है। इसलिए यह जरूरी है कि विद्यार्थी अपने माता – पिता, गुरु और बड़े बुजुर्गों के प्रति अपने कर्तव्यों को समझे और उन्हें पूरा करे।

स्वयं की जिम्मेदारी:-

विद्यार्थी जीवन का एक बड़ा गुण यह भी है कि विद्यार्थी अपने सम्पूर्ण जीवन का खुद जिम्मेदार बने। उसे चाहिए कि वह अपने प्रत्येक कार्य को स्वयं ही सही समय पर सम्पूर्ण करे। इतना ही नहीं विद्यार्थी को अपने कार्यों में रही कमजोरी का स्वयं जिम्मेवार बनकर उन्हें सुधार करना चाहिए बजाय दूसरे को दोषी ठहराने के। क्योंकि जब तक हम अपनी जिंदगी की सम्पूर्ण जिम्मेदारी खुद नहीं लेंगे तब तक हम जीवन में सफलता के लिए संघर्ष करने में पीछे हटते रहेंगे।

अनुशासन:-

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन वह मूल गुण है जो व्यक्ति के बचपन से बुढ़ापे तक अलग ही पहचान बनाए रखता । अनुशासन ही है जिससे हम दूसरों से सम्मान पाते हैं समाज में अच्छे नागरिक के रूप में पहचान बनती है । यह बात बिल्कुल निश्चित है कि अनुशासन ही व्यक्ति की सम्पूर्ण समाज में वह सुन्दर पहचान है जिसे कोई व्यक्ति पैसे से बाल के बराबर भी नहीं खरीद सकता।
प्रिय विद्यार्थियो आपको यह लेख कैसा लगा हमें comment box में लिखकर बतायें
 
 

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